झूठे मुकदमे में फंसा परिवार, अदालत ने सुनाया सख्त फैसला
15 साल पुरानी शादी खत्म, महिला पर 1 लाख रुपये का जुर्माना
रिपोर्ट /सत्य प्रकाश
बरेली। पारिवारिक न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न कानून के कथित दुरुपयोग के एक मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए अहम निर्णय सुनाया है। अदालत ने पाया कि वैवाहिक विवाद को आपराधिक मुकदमे का रूप देकर पति और उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इस पर न्यायालय ने महिला पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाते हुए एक माह के भीतर यह राशि पति को अदा करने का आदेश दिया।
अदालत ने साथ ही लगभग 15 वर्ष पुराने वैवाहिक संबंध को समाप्त करने की अनुमति दे दी। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि कानून का उद्देश्य सुरक्षा प्रदान करना है, न कि व्यक्तिगत प्रतिशोध का माध्यम बनना।
विवाद की पृष्ठभूमि
विवाह के कुछ वर्षों बाद दोनों पक्षों के बीच मतभेद बढ़ते चले गए। पति की ओर से आरोप लगाया गया कि पत्नी द्वारा आय और सामाजिक स्थिति को लेकर अपमानजनक व्यवहार किया गया। वहीं दूसरी ओर पत्नी ने दहेज उत्पीड़न समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया।
मामला विभिन्न न्यायालयों में लंबित रहने के बाद अंततः पारिवारिक न्यायालय में विस्तृत सुनवाई के लिए आया, जहां साक्ष्यों और परिस्थितियों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने यह निर्णय सुनाया।
अदालत की अहम टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि दहेज उत्पीड़न कानून महिलाओं की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है, किंतु यदि इसका अनुचित उपयोग होता है तो इससे वास्तविक पीड़ितों के न्याय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि वैवाहिक जीवन पारस्परिक सम्मान और विश्वास पर आधारित होता है, और जब यह आधार समाप्त हो जाए तो संबंधों का औपचारिक अंत ही उचित विकल्प रह जाता है।
इस फैसले को लेकर कानूनी जगत में चर्चा शुरू हो गई है और इसे दहेज कानून के दुरुपयोग के मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।


