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बरेली में अकीदत के साथ मनाई गई ईद-उल-फितर, मुल्क की तरक्की और फिलिस्तीन के लिए मांगी गई दुआ

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बरेली में अकीदत के साथ मनाई गई ईद-उल-फितर, मुल्क की तरक्की और फिलिस्तीन के लिए मांगी गई दुआ

रिपोर्ट /सत्य प्रकाश 

बरेली। रमज़ान के मुकद्दस महीने के बाद आने वाला ईद-उल-फितर का त्यौहार रविवार को शहर भर में अकीदत और खुशियों के साथ मनाया गया। सुबह से ही बच्चे, नौजवान और बुजुर्ग नए कपड़े पहनकर मस्जिदों और ईदगाहों की ओर रवाना हुए। नमाज़ अदा करने के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और घर-घर में खुशियों का माहौल दिखाई दिया।

शहर की मुख्य ईद की नमाज़ बाकरगंज स्थित ईदगाह में सुबह 10:30 बजे अदा की गई, जिसे ग्रैंड मुफ्ती मुफ्ती असजद रज़ा कादरी (असजद मियां) ने अदा कराई। नमाज़ के बाद उन्होंने खुत्बा पढ़ा और मुल्क-ए-हिंदुस्तान की तरक्की, अमन-चैन और दुनिया भर के मुसलमानों, खासकर फिलिस्तीन और मस्जिद-ए-अक्सा की हिफाज़त के लिए खास दुआ कराई।

इस मौके पर काज़ी-ए-हिंदुस्तान के दामाद व जमात रज़ा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान (फरमान मियां) ने लोगों को ईद की मुबारकबाद देते हुए कहा कि देश में हमेशा अमन और भाईचारा कायम रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि रोजेदारों ने जिस तरह रमज़ान के पूरे महीने इबादत और परहेज़गारी में वक्त बिताया, उसी तरह आगे भी नेक रास्ते पर चलते रहना चाहिए।

ईदगाह की व्यवस्थाएं ईदगाह कमेटी के खलील अहमद, हबीब हुसैन, महताब अली, शादाब हुसैन, महबूब अंसारी और आमिर खान समेत अन्य सदस्यों ने संभाली। नमाज़ के बाद लोगों ने कब्रिस्तानों में जाकर अपने मरहूम परिजनों की कब्रों पर फातिहा पढ़कर ईसाले सवाब किया।

शहर की विभिन्न दरगाहों और मस्जिदों—दरगाह वली मियां, दरगाह ताजुश्शरिया, दरगाह शाह शराफत मियां, दरगाह बशीर मियां, खानकाह-ए-वामिकिया, खानकाह-ए-नियाजिया, दरगाह शाहदाना वली, दरगाह रफीक-उल-औलिया, जामा मस्जिद, नौमहला मस्जिद, मस्जिद बीबी जी, पीराशाह मस्जिद, हबिबिया मस्जिद, नूरानी मस्जिद, कचहरी वाली मस्जिद और मुफ्ती आजम हिंद मस्जिद समेत अन्य स्थानों पर भी तय समय पर ईद की नमाज़ अदा की गई।

दरगाह आला हज़रत की रज़ा मस्जिद में सुबह 11 बजे मुफ्ती ज़हीम रज़ा ने ईद की नमाज़ अदा कराई और खुत्बा पढ़ा। इसके बाद अल्लामा तौसीफ मियां ने दुनिया भर में अमन और सुकून के लिए खास दुआ कराई। नमाज़ से पहले मुफ्ती ज़हीम रज़ा ने कहा कि अल्लाह ने अपने बंदों को तीस रोज़ों का इनाम ईद के रूप में अता किया है। रोजेदारों को चाहिए कि रमज़ान में अपनाई गई नेकी और परहेज़गारी को पूरी जिंदगी कायम रखें।

इस दौरान मरकज़-ए-अहले सुन्नत वेलफेयर ट्रस्ट के अलहाज मोहसिन हसन खान, मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी, हाजी जावेद खान, शाहिद नूरी, परवेज नूरी, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, औरंगज़ेब नूरी, मंजूर खान, मुजाहिद रज़ा, काशिफ रज़ा, खालिद नूरी, साजिद रज़ा, आसिम रज़ा समेत बड़ी संख्या में लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।

नमाज़ के बाद घरों में दावतों का दौर शुरू हुआ और बड़ों ने बच्चों को ईदी देकर उनकी खुशियां दोगुनी कर दीं। शहर भर में पूरे दिन ईद की रौनक और भाईचारे का माहौल देखने को मिला।

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