Wednesday, July 29, 2026
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बरेली में मिशन संपत्तियों पर बड़ा खेल! फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से चर्च की जमीन हड़पने का आरोप, कई बड़े नाम घिरे

 बरेली में मिशन संपत्तियों पर बड़ा खेल! फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से चर्च की जमीन हड़पने का आरोप, कई बड़े नाम घिरे

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कोर्ट में दायर शिकायत में चर्च पदाधिकारियों समेत सात लोग नामजद, पुलिस कार्रवाई न होने पर धारा 156(3) के तहत न्यायालय की शरण

संपादक/धीरेन्द्र सिंह ( धीरू)

 

बरेली में मिशन संपत्तियों की हेराफेरी का एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। मेथोडिस्ट चर्च की बहुमूल्य जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों और जाली पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए अपने नाम कराने का आरोप लगाया गया है। मामला इतना गंभीर है कि पुलिस स्तर पर कार्रवाई न होने के बाद शिकायतकर्ता को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

यह शिकायत रामचरण दास, पूर्व एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी (एनआईआरसीएमसीआई) एवं एसोसिएट पास्टर, मेथोडिस्ट चर्च शाहजहांपुर द्वारा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बरेली की अदालत में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत दायर की गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सिविल लाइंस थाना कोतवाली क्षेत्र स्थित चर्च की प्लॉट संख्या 106, जो लगभग 150 वर्ग मीटर की अत्यंत मूल्यवान संपत्ति है, को वर्ष 2006 में सुनियोजित तरीके से फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर रजिस्ट्री करा दी गई।

शिकायत के अनुसार, एक ही दिन दो अलग-अलग बैनामे कराए गए और दस्तावेजों में हेरफेर करते हुए संपत्ति को परिवार के सदस्यों के बीच स्थानांतरित दिखाया गया। आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में चर्च के नियमों और ट्रस्ट की शर्तों की अनदेखी कर निजी लाभ के लिए संपत्ति का दुरुपयोग किया गया।

मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मुंबई स्थित संबंधित रजिस्ट्रार कार्यालय से जानकारी मांगी गई। जवाब में बताया गया कि जिस क्रम संख्या पर पावर ऑफ अटॉर्नी दर्ज होने का दावा किया गया है, उस नंबर पर कोई वैध पंजीकरण मौजूद नहीं है। इससे फर्जीवाड़े की आशंका और मजबूत हो गई।

शिकायत में चर्च से जुड़े कई पदाधिकारियों और व्यक्तियों को नामजद किया गया है। इनमें पादरी सुनील के. मसीह, विलियम दिलावर, पास्टर बी.आर.के. लाल, श्रीमती मिल्ड्रेड मसीह, श्रीमती ललिता मसीह, श्रीमती प्रतिमा विलियम और कुमारी प्रगति शामिल हैं। आरोप है कि सुनियोजित तरीके से चर्च की संपत्ति को कब्जाने की साजिश रची गई।

शिकायतकर्ता का कहना है कि 25 नवंबर 2021 को थाना कोतवाली बरेली में लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और पुलिस अधीक्षक नगर को भी प्रार्थना पत्र भेजा गया, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः न्यायालय में धारा 156(3) के तहत आवेदन देकर पुलिस जांच के आदेश की मांग की गई।

मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया एक पंजीकृत पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है और इसकी संपत्तियां धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों के लिए सुरक्षित मानी जाती हैं। ऐसे में यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल आर्थिक अनियमितता बल्कि धार्मिक ट्रस्ट की संपत्तियों के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।

अब सभी की नजर अदालत के आदेश और संभावित पुलिस जांच पर टिकी है। यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो मिशन संपत्तियों से जुड़े बड़े स्तर के घोटाले की परतें खुल सकती हैं।

 

मामले की बड़ी बातें

सिविल लाइंस, बरेली स्थित चर्च के प्लॉट पर फर्जीवाड़े का आरोप

वर्ष 2006 में फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी से कराई गई रजिस्ट्री

RTI में संबंधित पावर ऑफ अटॉर्नी का रिकॉर्ड नहीं मिला

पुलिस ने शिकायत के बावजूद दर्ज नहीं की एफआईआर

कोर्ट में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत जांच की मांग

चर्च पदाधिकारियों समेत 7 लोग नामजद जिन लोगों को शिकायत में नामजद किया गया है

पादरी सुनील के. मसीह – एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी, नॉर्थ इंडिया रीजनल कॉन्फ्रेंस ऑफ मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया, निवासी 91 सिविल लाइंस, थाना कोतवाली, बरेली।

विलियम दिलावर – निवासी बीआई बाजार, थाना कैंट, जिला बरेली।

पास्टर बी. आर. के. लाल – पूर्व जिला सुपरिटेंडेंट, निवासी 91 सिविल लाइंस, कोतवाली, बरेली।

श्रीमती मिल्ड्रेड मसीह – पत्नी सुनील के. मसीह, निवासी 91 सिविल लाइंस, बरेली।

श्रीमती ललिता मसीह – पत्नी आनंद सैमसन, निवासी मोहल्ला गांधी टोला, नवाबगंज, जिला बरेली।

श्रीमती प्रतिमा विलियम – पत्नी विलियम दिलावर, निवासी कैंट क्षेत्र, बरेली।

कुमारी प्रगति – पुत्री विलियम दिलावर, निवासी बरेली।

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