139 साल बाद गूंजा आत्मविश्वास: सिंगापुर में ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का संदेश, यूपी को 6650 करोड़ निवेश का प्रस्ताव
रिपोर्ट /राजेश सिंह
सिंगापुर। करीब 139 वर्ष पहले जब Swami Vivekananda ने विश्व धर्म सम्मेलन में भारत की आध्यात्मिक चेतना का उद्घोष किया था, तब दुनिया ने एक आत्मविश्वासी भारत की झलक देखी थी। उसी आत्मविश्वास की प्रतिध्वनि अब सिंगापुर में सुनाई दी, जब Yogi Adityanath ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष उत्तर प्रदेश की विकास गाथा का प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया।
6650 करोड़ निवेश और 20 हजार रोजगार का रास्ता साफ
सिंगापुर में आयोजित निवेशक बैठकों के दौरान उत्तर प्रदेश के लिए करीब 6650 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों पर सहमति बनी। इन समझौतों से 20 हजार से अधिक रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है। सरकार का दावा है कि यह निवेश प्रदेश में औद्योगिक विस्तार, लॉजिस्टिक्स, आईटी और सेवा क्षेत्रों को नई गति देगा।
DBS बैंक की रुचि बनी चर्चा का केंद्र
दुनिया की अग्रणी बैंकिंग संस्थाओं में शामिल DBS Bank के सीईओ ने उत्तर प्रदेश में विशेष परियोजनाओं को संचालित करने में रुचि दिखाई। इसे प्रदेश के प्रति वैश्विक वित्तीय संस्थाओं के बढ़ते विश्वास के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य में बड़े विदेशी निवेश का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का वैश्विक संदेश
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने संस्कृत के प्रसिद्ध श्लोक “अयं निजः परो वेति…” का उल्लेख करते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत संकीर्णता नहीं, बल्कि वैश्विक सहभागिता की नीति पर आगे बढ़ रहा है।
जेवर इंटरनेशनल सिटी पर विशेष जोर
Noida International Airport के आसपास प्रस्तावित इंटरनेशनल सिटी और उससे जुड़े विकास मॉडल को भी इस यात्रा में प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। सरकार के अनुसार यह परियोजना केवल रियल एस्टेट तक सीमित नहीं होगी, बल्कि एविएशन, लॉजिस्टिक्स, आईटी और वैश्विक सप्लाई चेन का समेकित हब बनेगी।
बदलती छवि का संकेत
प्रदेश सरकार का दावा है कि बेहतर कानून-व्यवस्था, मजबूत आधारभूत ढांचा और निवेश-हितैषी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान बना रहा है।
संदेश स्पष्ट है—भारत अब आध्यात्मिक विरासत के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी विश्व मंच पर अपनी शर्तों पर संवाद कर रहा है। सिंगापुर की यह यात्रा उसी आत्मविश्वासी और उभरते भारत का प्रतीक मानी जा रही है।


