बरेली में सूदखोरी का आतंक बरकरार: नौजवान युवक की संदिग्ध मौत,
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली
तीन लाख के कर्ज ने ली जान या दी गई साज़िशी मौत?
बरेली। शहर में सूदखोरी का जाल लगातार फैलता जा रहा है और इसका खौफ अब लोगों की जान तक ले रहा है। थाना सुभाषनगर क्षेत्र में एक 25 वर्षीय युवक की फांसी पर लटकती लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक विजय साहू की मौत ने पूरे इलाके में सूदखोरों के आतंक और पुलिस की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली जाने के बहाने निकला घर से, मिला खंडहर में लटकता शव
करगैना गैटिया निवासी विजय साहू रविवार शाम घर से यह कहकर निकला था कि वह दिल्ली जा रहा है। लेकिन देर रात तक जब वह घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने फोन मिलाया—जो बंद मिला। सोमवार सुबह ग्रामीणों ने गांव से कुछ दूरी पर मिलक रौधी गांव के पास स्थित शिव मंगलम कॉलोनी के एक खंडहर मकान में विजय का शव प्लास्टिक की रस्सी से फंदे पर लटकता देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
3 लाख के कर्ज में था दबा, सूदखोरों पर धमकियों का आरोप
मृतक के भाई विनोद साहू के अनुसार, विजय ने पड़ोस के कुछ सूदखोरों से करीब 3 लाख रुपये उधार लिए थे। आरोप है कि सूदखोर पैसे लौटाने के लिए लगातार दबाव बना रहे थे, धमकियां दे रहे थे और कई बार उसके साथ मारपीट भी की थी। परिवार का कहना है कि इन्हीं अत्याचारों से तंग आकर विजय ने आत्महत्या की, जबकि कुछ लोग शक जता रहे हैं कि उसकी हत्या कर शव को फांसी पर टांग दिया गया।
मां का रो-रोकर बुरा हाल, गांव में मातम
विजय दिल्ली में सब्जी बेचने का काम करता था और तीन भाई-बहनों में सबसे छोटा था। उसके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां प्रेमवती अपने बेटे का नाम लेकर बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। घर का माहौल मातम में बदल गया है।
पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट करेगी खुलासा
थाना सुभाषनगर पुलिस ने मौके से साक्ष्य जुटाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि हर एंगल से जांच की जा रही है—आत्महत्या या हत्या, इसका खुलासा रिपोर्ट आने के बाद होगा।
सवाल वही: कब थमेगा सूदखोरी का कारोबार?
बरेली में सूदखोरों का जाल तेजी से फैल रहा है। बेरोजगारी और आर्थिक संकट के बीच कई लोग इन कर्जखोरों के चंगुल में फंस रहे हैं। सूदखोरी अब सिर्फ आर्थिक शोषण नहीं रही, यह जानलेवा जाल बन चुकी है। सवाल है. कब तक आम लोग इन सूदखोरों के अत्याचारों का शिकार होते रहेंगे?




