अधिवक्ता समाज का निर्णायक ऐलान:
सोनभद्र टोल पर महिला अधिवक्ता से मारपीट के विरोध में आंदोलन तेज,
गिरफ्तारी तक नहीं देंगे टोल – प्रदीपधर तिवारी ‘देवघर’
रिपोर्ट/राजेश सिंह
पूर्व में हैदरगढ़ टोल प्लाज़ा पर अधिवक्ताओं के साथ हुई अभद्रता और अन्याय के विरोध में चल रहा “टोल शुल्क न देने” का आंदोलन अब और अधिक व्यापक होने जा रहा है। सोनभद्र टोल प्लाज़ा पर एक महिला अधिवक्ता के साथ मारपीट व अभद्रता की घटना ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
अधिवक्ता समाज का कहना है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि टोल प्लाज़ाओं पर लगातार हो रही सुनियोजित लापरवाही और अधिवक्ताओं की सुरक्षा के प्रति उदासीनता का परिणाम है। हैदरगढ़ की घटना से प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया, जिसका नतीजा सोनभद्र जैसी शर्मनाक घटना के रूप में सामने आया।
इस प्रकरण को लेकर पूरे अधिवक्ता समाज में भारी आक्रोश और रोष व्याप्त है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सोनभद्र टोल कांड के दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होती और हैदरगढ़ सहित सभी पूर्व टोल मामलों में निष्पक्ष, ठोस व कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, तो आंदोलन और अधिक उग्र व व्यापक किया जाएगा।
अधिवक्ता समाज की स्पष्ट घोषणा
जब तक—
- सोनभद्र टोल प्रकरण के सभी दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती
- हैदरगढ़ टोल कांड सहित पूर्व मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं होती
महिला अधिवक्ताओं सहित समस्त अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती
तब तक—
- “टोल नहीं देंगे” आंदोलन जारी रहेगा
- किसी भी टोल प्लाज़ा पर कोई भी अधिवक्ता टोल शुल्क अदा नहीं करेगा
अधिवक्ता समाज ने दो टूक कहा है कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि अन्याय, अपमान और असुरक्षा के खिलाफ है। यदि न्याय नहीं मिला, तो संघर्ष थमेगा नहीं।


