Home Bareilly आईवीआरआई की 27वीं प्रसार परिषद बैठक में बड़े फैसले: वैज्ञानिक तकनीक सीधे...

आईवीआरआई की 27वीं प्रसार परिषद बैठक में बड़े फैसले: वैज्ञानिक तकनीक सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर

0
Oplus_0

आईवीआरआई की 27वीं प्रसार परिषद बैठक में बड़े फैसले: वैज्ञानिक तकनीक सीधे किसानों तक पहुंचाने पर जोर

  1. ओडिशा सरकार ने आईवीआरआई को नॉलेज पार्टनर बनाने का प्रस्ताव दिया
  2. 2030 तक उर्वरक उपयोग में 25% कमी का लक्ष्य
  3. 1.45 लाख किसानों तक पहुंच, महिलाओं की भागीदारी बढ़ी
  4. तकनीकी नवाचार, स्टार्टअप और प्रिसिजन पशुपालन पर फोकस

बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में शनिवार को आयोजित 27वीं प्रसार परिषद की बैठक में किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकों के प्रभावी हस्तांतरण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में ओडिशा सरकार द्वारा आईवीआरआई को नॉलेज पार्टनर बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिससे संस्थान की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होने के संकेत मिले।

बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक एवं संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने कहा कि वैज्ञानिक शोध और किसानों के खेत के बीच की दूरी को समाप्त करना ही प्रसार सेवाओं का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और अटारी के माध्यम से नई तकनीकों के प्रभावी प्रसार, प्रशिक्षण कार्यक्रमों के विस्तार और किसानों के फीडबैक के आधार पर सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही ओपन डे, लघु वीडियो और स्कूल-कॉलेजों से संवाद जैसे नवाचारों को अपनाने की बात कही।

सहायक महानिदेशक (कृषि प्रसार) डॉ. आर.आर. बर्मन ने संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए मिट्टी परीक्षण, सॉयल हेल्थ कार्ड, जैविक खाद और बायोफर्टिलाइजर के उपयोग को आवश्यक बताया। उन्होंने वर्ष 2030 तक उर्वरकों के इस्तेमाल में 25 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य भी रखा।

प्रसार शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ. एच.आर. मीना ने बताया कि पिछली बैठक की 18 सिफारिशों को पूरी तरह लागू कर लिया गया है। वहीं संयुक्त निदेशक डॉ. रूपसी तिवारी ने जानकारी दी कि संस्थान ने पिछले वर्ष 15,521 प्रसार गतिविधियों के माध्यम से लगभग 1.45 लाख किसानों तक पहुंच बनाई, जिसमें महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। किसानों के लिए फार्म स्कूल, प्रशिक्षण, परामर्श सेवाएं और तकनीकी साहित्य भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

बैठक में कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान, कानपुर के निदेशक डॉ. राघवेंद्र सिंह ने पशु विज्ञान से जुड़े पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज को कृषि विज्ञान केंद्रों के जरिए किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने वैक्सीन विकास, सस्ती जांच तकनीक, पशु पोषण सुधार और प्रिसिजन पशुपालन तकनीकों को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई।

इसके साथ ही युवाओं को पशुपालन क्षेत्र में स्टार्टअप और रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर सहमति बनी। प्रसार गतिविधियों के प्रभाव का सही आकलन करने के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) विकसित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि योजनाओं की जमीनी सफलता को बेहतर तरीके से मापा जा सके।

निष्कर्ष:

बैठक में लिए गए निर्णयों से साफ है कि अब आईवीआरआई शोध को सीधे किसानों तक पहुंचाने, आधुनिक तकनीकों के विस्तार और कृषि-पशुपालन को लाभकारी बनाने की दिशा में और तेजी से काम करेगा।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version