जिला अस्पताल प्रकरण पर सख्त हुए डिप्टी CM बृजेश पाठक, बरेली के स्वास्थ्य अफसरों में मची खलबली
गरीब मरीज की अनदेखी पर हाईलेवल कार्रवाई के संकेत
रिपोर्ट राजेश सिंह
बरेली जिला अस्पताल में सामने आई संवेदनहीनता की घटना पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कड़ा रुख अपना लिया है। रविवार शाम सोशल मीडिया पर दिए गए उनके संदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मंत्री के तेवरों से साफ संकेत मिले हैं कि मामले में सिर्फ औपचारिक जांच नहीं बल्कि बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।
“मरीज मेरे लिए ईश्वर का रूप” — स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री ने अपने संदेश में स्पष्ट कहा कि यदि शासन स्तर पर किसी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत हो तो उसका प्रस्ताव एक सप्ताह के भीतर शासन को भेजा जाए। उन्होंने कहा कि गरीब और असहाय मरीजों की सेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने यह भी दोहराया कि मरीज उनके लिए ईश्वर के समान हैं और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
क्लास वन अफसरों पर भी गिर सकती है गाज
सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले ने बरेली के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। वजह यह है कि सीएमओ और सीएमएस स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए शासन की अनुमति आवश्यक होती है। स्वास्थ्य मंत्री के सख्त रुख के बाद अब यह माना जा रहा है कि जांच सिर्फ निचले कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगी।
डेमेज कंट्रोल में जुटा अस्पताल प्रशासन
बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल प्रशासन अब डेमेज कंट्रोल मोड में आ गया है। अस्पताल के कई कर्मचारियों को उस पीड़ित व्यक्ति तक पहुंचने और उसे संतुष्ट करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि जांच कमेटी के आने से पहले शिकायत को शांत कराया जा सके।
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि कोशिश की जा रही है कि पीड़ित से लिखित रूप में यह लिया जाए कि अब उसे अस्पताल प्रशासन से कोई शिकायत नहीं है।
डीएम से भी मांगी गई रिपोर्ट
अपुष्ट सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले में बरेली के जिलाधिकारी से भी जानकारी ली है। इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति ने अपनी जांच और तेज कर दी है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट आने के बाद कई अधिकारियों की जवाबदेही तय हो सकती है।
चुनावी साल से पहले सरकार नहीं चाहती विवाद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्ष 2027 में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोई नकारात्मक संदेश नहीं जाने देना चाहती। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और सड़क जैसे मुद्दे सीधे जनता को प्रभावित करते हैं। ऐसे में बरेली जिला अस्पताल का मामला सरकार के लिए संवेदनशील माना जा रहा है।
पूरे प्रदेश के लिए बन सकता है उदाहरण
यदि स्वास्थ्य मंत्री के सख्त तेवरों के अनुरूप कार्रवाई होती है तो यह सिर्फ बरेली ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ा संदेश साबित हो सकता है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
