मृतक को बनाया जमानती! कोर्ट रिकॉर्ड से “खेल” बरेली में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर,

Picture of Bhaskar News 24

Bhaskar News 24

Share करें

✓ Link copy हो गया!

मृतक को बनाया जमानती! कोर्ट रिकॉर्ड से “खेल” बरेली में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर,

फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/हैदर अली

आरोपी ने पेश किया मरे हुए व्यक्ति का जमानतनामा

अदालत में जमानत के लिए मृतक की पहचान का इस्तेमाल आरोपियों पर दस्तावेज़ों से छेड़छाड़, कोर्ट रिकॉर्ड गायब कराने का आरोप; SSP से निष्पक्ष जांच की मांग

बरेली। बरेली न्यायालय में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर दिया है।

आरोप है कि एक आरोपी ने मृत व्यक्ति को जमानती बनाकर अदालत में जमानत हासिल कर ली और बाद में पूरे रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर फर्जी दस्तावेज़ बदलवा दिए गए। यह मामला थाना बारादरी क्षेत्र से जुड़ा है, जिसे लेकर प्रार्थी शारिक अब्बासी ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली को गंभीर शिकायत दी है।

प्रार्थी का कहना है कि उसने मु0अ0सं0-707/2023, थाना बारादरी, जिला बरेली में सात लोगों मोहम्मद साजिद, रईस मियां, शमशाद हुसैन, नजीबुर्रहमान, इदरीस मियां, सईद मियां और अब्दुल शब्बीर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अदालत में इन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है।

मृत व्यक्ति बना जमानती!

प्रार्थी ने बताया कि दिनांक 23 अक्टूबर 2024 को आरोपी शमशाद हुसैन ने अदालत में जमानत के लिए जिन जमानतदारों को प्रस्तुत किया, उनमें से एक का नाम अनीस अहमद पुत्र अब्दुल मजीद था। इस व्यक्ति की मृत्यु 27 जून 2023 को ही हो चुकी थी और उसका मृत्यु प्रमाणपत्र नगर निगम बरेली में 30 अगस्त 2023 को पंजीकृत है (पंजीकरण संख्या D2023:9-90233-006568)। इसके बावजूद मृतक का आधार कार्ड, वाहन की आरसी और फोटो लगाकर उसका जमानतनामा दाखिल किया गया, जिसे अदालत ने उसी दिन स्वीकार भी कर लिया।

नकल मांगी तो रिकॉर्ड गायब!

शारिक अब्बासी का कहना है कि जब उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई, तो उन्होंने जमानतनामे की सत्यापित प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदन किया, लेकिन नकल विभाग ने प्रति जारी नहीं की। आरोप है कि आरोपी साजिद सकलैनी, जो उस समय अदालत के लिपिक राजकुमार का “खास” बताया जा रहा है, ने सांठगांठ कर पत्रावली से असली जमानतनामा हटवाकर दूसरा दस्तावेज़ दाखिल करवा दिया।

प्रार्थी ने बताया कि जब उन्होंने 3 अप्रैल 2025 को पुराने जमानतनामे की तलाश की मांग की, तो लिपिक ने एक फर्जी आख्या तैयार कर अधिकारियों को गुमराह किया कि “प्रपत्र स्पष्ट न होने पर न्यायालय ने अधिवक्ता से स्पष्ट प्रति मांगी थी” — जबकि ऐसा कोई आदेश नहीं था।

जांच की मांग ‘कोर्ट से की गई धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो’

प्रार्थी ने अपने मोबाइल से खींची गई जमानतनामे की तस्वीरें और दस्तावेज़ों के नमूने भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने मांग की है कि इन दस्तावेजों की हैंडराइटिंग और स्टाम्प की जांच एक्सपर्ट से कराई जाए ताकि असली और फर्जी जमानतनामे का भेद खुल सके।

उन्होंने SSP से अनुरोध किया है कि आरोपी शमशाद हुसैन, नजीबुर्रहमान, रईस मियां, इदरीस मियां, साजिद सकलैनी, लिपिक राजकुमार और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, दस्तावेज़ों में जालसाजी और न्यायालय के साथ छल के अपराध में मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

न्याय की उम्मीद में भटक रहा प्रार्थी

प्रार्थी शारिक अब्बासी का कहना है कि उन्होंने पूरे साक्ष्य के साथ शिकायत दी है, पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा

“अगर मृत व्यक्ति भी जमानती बन सकता है, तो फिर कानून का मजाक उड़ाने वालों के हौसले का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब मुझे न्याय चाहिए, चाहे इसके लिए कितनी भी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।”

यह मामला न्यायालय की साख और प्रशासन की ईमानदारी की परीक्षा बन गया है। अब देखना यह है कि SSP बरेली इस गंभीर फर्जीवाड़े पर क्या कदम उठाते हैं।

Bhaskar News 24
Author: Bhaskar News 24

Share करें

✓ Link copy हो गया!
सबसे ज्यादा पड़ गई