पुलिस के खिलाफ विरोध तेज: वकीलों का सड़क पर धावा, चौकी चौराहे पर जाम, कलेक्ट्रेट तक मार्च
फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/राजेश सिंह
बरेली। कचहरी में अधिवक्ताओं पर हुए हमले को लेकर शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। शुक्रवार को डीआईजी कार्यालय घेरने के बाद मंगलवार को भी वकीलों ने सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह से ही अधिवक्ताओं ने चौकी चौराहे पर चक्का जाम कर दिया, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। बड़ी संख्या में वकील सड़क पर बैठकर धरना देने लगे।
इसके बाद सैकड़ों अधिवक्ता पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि 18 नवंबर को बार एसोसिएशन की पार्किंग में हुए हमले में आरोपी के खिलाफ धारा 307 और एससी-एसटी एक्ट जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था, लेकिन पुलिस ने उसे 151 सीआरपीसी में चालान कर दिया। इस ‘हल्की कार्रवाई’ से वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया।
शुक्रवार को डीआईजी ऑफिस घेराव के दौरान अधिवक्ताओं ने विवेचना बदलने की मांग उठाई थी। डीआईजी अजय कुमार साहनी के आश्वासन के बाद विरोध खत्म हुआ, लेकिन वकीलों ने दो टूक चेतावनी दी थी कि यदि कार्रवाई संतोषजनक नहीं हुई तो वे दोबारा सड़क पर उतरेंगे—और मंगलवार को वही हुआ।
बार एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि पुलिस की लापरवाही और अधिवक्ताओं के साथ हुए अमानवीय व्यवहार से वकीलों में रोष लगातार बढ़ रहा है। आक्रोशित अधिवक्ताओं ने एसपी सिटी के कार्यालय का भी घेराव कर विरोध जताया। मनोज कुमार हरित, दीपक पांडे, रोहित यादव, नसीम सैफी, सोमेंद्र यादव, अमरदीप सक्सेना, मोबिन अंसारी, चमन आरा और अब्दुल इमरान समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता इस प्रदर्शन का हिस्सा बने।
उधर, मूल विवाद में दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर मुकदमे दर्ज कराए हैं। अधिवक्ता शकील हुसैन ने प्रगतिनगर निवासी आशीष सिंह और उसके साथियों पर लोहे की रॉड से जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, आशीष ने तहरीर में कहा कि उसके दोस्त से गलती से बाइक का इंडिकेटर टूट गया था, जिसके बाद उसने माफी भी मांगी, लेकिन अधिवक्ता शकील और उनके साथियों ने उस पर हमला कर दिया और जान से मारने की धमकी दी।





