**आंकड़े बड़े, ज़मीनी हकीकत गायब

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**आंकड़े बड़े, ज़मीनी हकीकत गायब

डेयरी योजनाओं पर सांसद नीरज मौर्य ने लोकसभा में सरकार को घेरा**

रिपोर्ट राजेश सिंह 

नई दिल्ली/आंवला।

आंवला से समाजवादी पार्टी के सांसद नीरज मौर्य द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न से राष्ट्रीय गोकुल मिशन और केंद्र सरकार की डेयरी योजनाओं के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सांसद ने देशी नस्लों की उत्पादकता, किसानों की वास्तविक आय और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रयोगशालाओं से होने वाले लाभ को लेकर सरकार से स्पष्ट और क्षेत्रवार जानकारी मांगी थी।

सांसद नीरज मौर्य ने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के आंवला, शाहजहांपुर, बदायूं, जौनपुर और मछलीशहर जैसे जिलों में किसानों को मिले वास्तविक लाभ, लागत-लाभ का अनुपात और जमीनी प्रभाव पर जवाब तलब किया था।

सरकार ने अपने उत्तर में दावा किया कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पिछले 11 वर्षों में देशी गोवंश की उत्पादकता में 36.63 प्रतिशत तथा कुल दुग्ध उत्पादन में लगभग 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश में दूध उत्पादन 2014-15 के 239.10 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 374.60 लाख टन होने की बात कही गई। साथ ही बताया गया कि देशभर में 24 IVF प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं, जिनसे हजारों भ्रूण तैयार कर प्रत्यारोपित किए गए।

हालांकि सांसद नीरज मौर्य ने सरकार के जवाब को आंकड़ों का पुलिंदा करार देते हुए कहा कि आंवला, शाहजहांपुर और बदायूं जैसे पिछड़े जिलों में छोटे व सीमांत किसानों की आय, बढ़ती लागत, चारे के दाम और दूध के वास्तविक मूल्य पर सरकार ने कोई ठोस जानकारी नहीं दी। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि योजनाओं का लाभ कितने किसानों तक वास्तव में पहुंचा और कितने आज भी इससे वंचित हैं।

सांसद का कहना है कि सिर्फ उत्पादन बढ़ने के आंकड़ों से किसानों की हालत नहीं सुधरती, जब तक उनकी आय में वास्तविक सुधार न हो। अंतिम किसान तक लाभ पहुंचाए बिना सरकारी दावे अधूरे और खोखले हैं।

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Author: Bhaskar News 24

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