“क्या इंसान को दूसरा मौका नहीं मिलना चाहिए?” — आशुतोष कौशिक के मामले ने फिर छेड़ी बहस* 

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*”क्या इंसान को दूसरा मौका नहीं मिलना चाहिए?” — आशुतोष कौशिक के मामले ने फिर छेड़ी बहस*

रिपोर्ट सत्य प्रकाश 

बरेली।दिल्ली हाई कोर्ट ने रियलिटी शो विजेता और अभिनेता gआशुतोष कौशिक की ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने अपने एक दशक पुराने विवादों और ड्रंक ड्राइविंग से जुड़ी खबरों, वीडियो और तस्वीरों को इंटरनेट से हटाने की मांग की थी।

कोर्ट ने माना कि ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ निजता के अधिकार का हिस्सा है, लेकिन इसका उपयोग किसी सार्वजनिक व्यक्ति के अतीत को चयनात्मक रूप से मिटाने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, केवल समय बीत जाने से किसी सार्वजनिक हस्ती के आचरण से जुड़ा जनहित समाप्त नहीं हो जाता।

 

हालांकि आशुतोष कौशिक का तर्क था कि वर्षों पुरानी घटनाएं आज भी उनके करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा और निजी जीवन को प्रभावित कर रही हैं। उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति बदल चुका है और जिम्मेदार जीवन जी रहा है, तो उसे अपनी पुरानी गलतियों के लिए जीवनभर दंडित नहीं किया जाना चाहिए।

 

यह मामला अब केवल आशुतोष कौशिक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि डिजिटल युग में निजता, पुनर्वास और ‘दूसरा मौका’ मिलने के अधिकार पर एक बड़ी बहस का विषय बन गया है।

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