चर्च संपत्तियों पर कब्जे का विवाद: मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया की वैधता पर सवाल

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चर्च संपत्तियों पर कब्जे का विवाद: मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया की वैधता पर सवाल

कई राज्यों में मुकदमे दर्ज, कोर्ट के आदेशों और दस्तावेजों के आधार पर संस्था की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर प्रश्न

संपादक /धीरेंद्र सिंह धीरू 

देशभर में चर्च और शैक्षणिक संस्थाओं की संपत्तियों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। “मेथोडिस्ट चर्च इन इंडिया” नामक संस्था पर आरोप है कि उसने विभिन्न राज्यों में चर्च, स्कूल और अन्य धार्मिक संपत्तियों पर अधिकार जताते हुए कथित रूप से कब्जा किया और कुछ मामलों में उन्हें बेचने या बेचने का प्रयास किया।

पंजीकरण और अधिकार क्षेत्र पर विवाद

उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतों के आधार पर संस्था के पंजीकरण और उसके नवीनीकरण को लेकर सवाल खड़े किए गए हैं। आरोप है कि संस्था का पंजीकरण कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं रहा।

बताया जा रहा है कि Bombay Public Trusts Act, 1950 के तहत कार्यक्षेत्र महाराष्ट्र तक सीमित होने के बावजूद संस्था ने अन्य राज्यों में भी अधिकार का दावा किया।

वहीं Societies Registration Act, 1860 के तहत समय पर नवीनीकरण न होने का दावा किया गया है, जिससे संस्था की वैधता पर प्रश्नचिह्न लगाए जा रहे हैं।

1982 के दस्तावेजों में कथित हेरफेर का आरोप

मामले में वर्ष 1982 के मूल प्रमाणपत्र में कथित हेरफेर कर संस्था के नाम में बदलाव किए जाने और फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करने के आरोप भी सामने आए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न राज्यों में चर्च संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने और बिक्री के प्रयास किए गए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला

शिकायतों में 30 सितंबर 2013 को Supreme Court of India द्वारा दिए गए एक आदेश का उल्लेख किया गया है, जिसमें कहा गया था कि बिना विधिक प्रक्रिया किसी ट्रस्ट या सोसायटी का विलय या संपत्ति हस्तांतरण मान्य नहीं है। केवल प्रस्ताव पारित कर देने से संपत्तियों पर वैध अधिकार स्थापित नहीं किया जा सकता।

कई राज्यों में दर्ज मुकदमे

इस प्रकरण में प्रयागराज, बरेली, कर्नाटक सहित कई स्थानों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं में मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। कुछ मामलों में गिरफ्तारी हुई और जमानत याचिकाएं भी खारिज होने की बात कही जा रही है।

मुरादाबाद में एक स्कूल की संपत्ति बेचने के प्रयास पर प्रशासन द्वारा रोक लगाए जाने का भी उल्लेख है।

पारदर्शिता और सुरक्षा पर उठे सवाल

मामले ने देशभर में धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं की संपत्तियों के प्रबंधन, पारदर्शिता और कानूनी सुरक्षा को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। कई शिकायतकर्ताओं ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

फिलहाल विभिन्न अदालतों और जांच एजेंसियों में इस संबंध में कार्यवाही जारी है।

मामले की मुख्य बातें

संस्था की वैधता और पंजीकरण पर सवाल

सोसायटी के समय पर नवीनीकरण न होने का दावा

1982 में मूल दस्तावेज में कथित हेरफेर का आरोप

कई राज्यों में चर्च व स्कूल संपत्तियों पर अधिकार विवाद

प्रयागराज, बरेली, कर्नाटक सहित विभिन्न स्थानों पर मुकदमे दर्ज

धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गईं

कुछ मामलों में गिरफ्तारी और जमानत याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बिना विधिक प्रक्रिया विलय/अधिकार को अमान्य बताया

प्रशासन ने कुछ संपत्तियों की बिक्री पर लगाई रोक

उच्चस्तरीय जांच की मांग, विभिन्न अदालतों में सुनवाई जारी

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Author: Bhaskar News 24

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