वन टाइम टैक्स व्यवस्था के विरोध में टैक्सी संचालकों का प्रदर्शन, आरटीओ को सौंपा ज्ञापन

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वन टाइम टैक्स व्यवस्था के विरोध में टैक्सी संचालकों का प्रदर्शन, आरटीओ को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्ट /सत्य प्रकाश 

बरेली, 24 फरवरी 2026।

केंद्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश में टैक्सी वाहनों पर लागू की गई नई “वन टाइम टैक्स” व्यवस्था के विरोध में टैक्सी मालिकों और संचालकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। 30 जनवरी 2026 को ऑनलाइन परिवहन पोर्टल पर अपलोड कर इस आदेश को लागू किया गया, जिसके तहत अब टैक्सी वाहनों पर एकमुश्त टैक्स जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है।

पूर्व में यह व्यवस्था तिमाही, छमाही और वार्षिक आधार पर लागू थी। अचानक लागू किए गए इस फैसले से हजारों टैक्सी संचालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

एकमुश्त डेढ़ लाख तक टैक्स, कैसे जुटाएंगे चालक?

टैक्सी संचालकों का कहना है कि एक वाहन पर लगभग 1 से 1.5 लाख रुपये तक का वन टाइम टैक्स देना होगा, जो एक आम ड्राइवर या छोटे मालिक के लिए बेहद कठिन है। बिना पूर्व सूचना के लागू की गई इस व्यवस्था से परिवहन कारोबार से जुड़े लोग परेशान हैं।

आरटीओ (प्रवर्तन) को सौंपा ज्ञापन

नई व्यवस्था में संशोधन की मांग को लेकर ट्रैवल एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन वेलफेयर एसोसिएशन, बरेली के नेतृत्व में जिला अध्यक्ष श्री देवेंद्र सिंह, मनोज पटेल (गुरु कृपा ट्रेवल्स), मुकेश सिंह राठौर (जगदीश ट्रेवल्स) समेत 40-50 यूनियन पदाधिकारियों और टैक्सी संचालकों ने आरटीओ (प्रवर्तन) कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें

टैक्सी संचालकों ने सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं—

पुरानी गाड़ियों पर टैक्स व्यवस्था पूर्व की भांति ही रखी जाए।

पुरानी गाड़ियों के लिए तिमाही, वार्षिक और लाइफ टाइम—तीनों विकल्प खोले जाएं।

नई व्यवस्था केवल नई टैक्सी गाड़ियों पर लागू की जाए।

अधिसूचना लागू होने के बाद जिन वाहनों पर ऑनलाइन टैक्स पेनल्टी, ई-चालान या वाहन सीज जैसी कार्रवाई हुई है, उन्हें तत्काल निरस्त किया जाए।

नियम का समर्थन, लेकिन संशोधन की मांग

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि वे नियम का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि पुरानी और नई गाड़ियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि छोटे टैक्सी संचालकों पर अचानक आर्थिक बोझ न पड़े।

सरकार से पुनर्विचार की अपील

टैक्सी संचालकों ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि इस फैसले पर पुनर्विचार करते हुए पुरानी गाड़ियों को राहत दी जाए। उनका कहना है कि नई गाड़ी खरीदते समय वन टाइम टैक्स की योजना बनाई जा सकती है, लेकिन पुरानी गाड़ियों पर अचानक इतनी बड़ी राशि थोपना अन्यायपूर्ण है।

अब देखना होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती

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Author: Bhaskar News 24

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