बेटी जन्मोत्सव में बवाल: बाउंसर की बदसलूकी से नाराज़ पत्रकारों का बहिष्कार, कार्यक्रम पड़ा फीका

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बेटी जन्मोत्सव में बवाल: बाउंसर की बदसलूकी से नाराज़ पत्रकारों का बहिष्कार, कार्यक्रम पड़ा फीका

रिपोर्ट सत्य प्रकाश 

बरेली।महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से आयोजित “बेटी जन्मोत्सव” कार्यक्रम उस वक्त विवादों में घिर गया, जब कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मियों के साथ कथित तौर पर बाउंसर ने अभद्र व्यवहार कर दिया। घटना के बाद नाराज़ पत्रकारों ने एकजुट होकर कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया और बीच में ही कवरेज छोड़कर बाहर निकल गए।

कार्यक्रम में कैसे बढ़ा विवाद

शनिवार को महिला जिला अस्पताल में आयोजित कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची थीं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, डॉक्टर और अन्य कर्मचारी मौजूद थे।

इसी दौरान कवरेज कर रहे पत्रकारों को एक बाउंसर ने रोक दिया। आरोप है कि उसने न सिर्फ कैमरा हटाने को कहा बल्कि धक्का-मुक्की भी की, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

पत्रकारों का विरोध और बहिष्कार

घटना से आक्रोशित मीडिया कर्मियों ने इसे अपने सम्मान पर हमला बताते हुए कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया। सभी पत्रकार एकजुट होकर बाहर निकल आए, जिससे आयोजन स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।

पत्रकारों का कहना है कि जिस कार्यक्रम का उद्देश्य बेटियों के सम्मान को बढ़ावा देना था, वहीं मीडिया के साथ ऐसा व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

उठे कई गंभीर सवाल

इस पूरे घटनाक्रम के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं—

सरकारी कार्यक्रम में बाउंसर की तैनाती क्यों की गई?

क्या प्रशासन को पहले से किसी विवाद की आशंका थी?

मीडिया को कवरेज से रोकने की जरूरत क्यों पड़ी?

वरिष्ठ पत्रकारों ने मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

प्रशासन की चुप्पी बनी चर्चा का विषय

घटना के कई घंटे बाद तक न तो जिला प्रशासन और न ही महिला आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई।

हालांकि कार्यक्रम जारी रहा, लेकिन मीडिया की गैरमौजूदगी के कारण इसकी चमक फीकी पड़ गई।

असर और संदेश

बेटी जन्मोत्सव जैसे सकारात्मक और संवेदनशील आयोजन में इस तरह का विवाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करता है।

यह घटना न केवल मीडिया और प्रशासन के रिश्तों में खटास दिखाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि ऐसे आयोजनों में संवाद और सम्मान दोनों की आवश्यकता है।

निष्कर्ष:

जहां एक ओर कार्यक्रम का उद्देश्य बेटियों के सम्मान को बढ़ावा देना था, वहीं दूसरी ओर मीडिया के साथ हुई इस घटना ने पूरे आयोजन की छवि पर सवाल खड़े कर दिए। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।

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Author: Bhaskar News 24

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