डीएम अविनाश सिंह का बड़ा फैसला: अब बरेली में हफ्ते में दो दिन रहेगा ‘नो व्हीकल डे’
खुद पैदल चलकर पहुंचे कलेक्ट्रेट, अफसरों को दिया ईंधन बचाने का संदेश
रिपोर्ट राजेश सिंह
बरेली। प्रधानमंत्री Narendra Modi और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के ईंधन बचाओ और पर्यावरण संरक्षण अभियान को अब बरेली प्रशासन ने जमीनी स्तर पर लागू करना शुरू कर दिया है। जिले के डीएम Avinash Singh ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने काफिले से एस्कॉर्ट गाड़ियां हटाने के बाद पूरे जिले में ‘नो व्हीकल डे’ लागू करने का ऐलान कर दिया है।
गार्ड और अर्दली के साथ पैदल पहुंचे डीएम
बुधवार सुबह डीएम अविनाश सिंह ने खुद उदाहरण पेश करते हुए सरकारी आवास से कलेक्ट्रेट तक पैदल पहुंचकर अधिकारियों और कर्मचारियों को साफ संदेश दिया कि ईंधन बचाना अब केवल अभियान नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। उनके साथ सुरक्षा गार्ड, अर्दली और अन्य कर्मचारी भी पैदल चलते नजर आए। डीएम के इस कदम की पूरे प्रशासनिक महकमे में चर्चा रही।
डीएम ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और ईंधन की खपत को देखते हुए प्रशासन को खुद आगे आकर मिसाल पेश करनी होगी, तभी आम जनता भी इस मुहिम से जुड़ेगी।
हफ्ते में दो दिन अफसर नहीं चलाएंगे गाड़ियां
जिला प्रशासन की नई व्यवस्था के तहत अब सप्ताह में दो दिन जिले के अधिकारी सरकारी और निजी वाहन का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इन दिनों सभी अधिकारियों को साइकिल से या पैदल दफ्तर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
डीएम का मानना है कि इससे एक तरफ सरकारी ईंधन खर्च में कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की फिटनेस भी बेहतर होगी। साथ ही शहर में प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।
अब सामूहिक रूप से जाएंगे अफसर
फील्ड विजिट को लेकर भी प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू की है। तहसील दिवस, समाधान दिवस और गांवों की चौपालों में अब अधिकारी अलग-अलग वाहनों से नहीं जाएंगे। इसके लिए सरकारी बसों और ई-बैटरी वाहनों का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि अनावश्यक ईंधन खर्च को रोका जा सके।
डीएम ने सभी विभागों को आदेश जारी करते हुए कहा है कि शासन की इस मुहिम को पूरी गंभीरता से लागू किया जाए और जनता को भी ईंधन बचाने के लिए प्रेरित किया जाए।
जनता में भी जा रहा सकारात्मक संदेश
डीएम अविनाश सिंह के इस कदम को प्रशासनिक सादगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी पहल माना जा रहा है। शहर में लोग इसे सकारात्मक बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भी प्रशासन की इस पहल की सराहना की है।





