IGRS शिकायतों में लापरवाही पर डीएम का बड़ा एक्शन, 15 अधिकारियों का वेतन रोका, 52 से मांगा जवाब
जनता के फीडबैक में खुली शिकायत निस्तारण की पोल, खराब प्रदर्शन पर प्रशासन सख्त
रिपोर्ट राजेश सिंह
बरेली में जनशिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। IGRS पोर्टल और विभिन्न हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई विभागों ने शिकायतों को कागजों में निस्तारित दिखा दिया, लेकिन शिकायतकर्ताओं को वास्तविक समाधान नहीं मिला। शिकायतकर्ताओं से प्राप्त फीडबैक में संतुष्टि का स्तर बेहद खराब मिलने पर डीएम ने सख्त कार्रवाई करते हुए 15 अधिकारियों और कर्मचारियों का वेतन रोकने के आदेश जारी कर दिए।
जांच में यह भी पाया गया कि कई विभागों ने शिकायतों के निस्तारण की औपचारिकता तो पूरी कर दी, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया। इससे शिकायतकर्ताओं में असंतोष बना रहा। मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का निर्णय लिया।
कार्रवाई के तहत चार उपजिलाधिकारियों (एसडीएम), पांच तहसीलदारों सहित कुल 52 अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इनमें आंवला, नवाबगंज, फरीदपुर और बहेड़ी के एसडीएम तथा विभिन्न तहसीलों के तहसीलदार और कई विभागीय अधिकारी शामिल हैं। उनसे पूछा गया है कि शिकायतों के निस्तारण के बावजूद जनता संतुष्ट क्यों नहीं हुई।
वेतन रोके जाने वाले अधिकारियों में स्वास्थ्य, विद्युत, शिक्षा, चकबंदी, दुग्ध विकास, बाल विकास, परिवहन निगम और पंजीकरण विभाग से जुड़े अधिकारी भी शामिल हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि शिकायत निस्तारण केवल पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिलनी चाहिए।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने सभी विभागों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनसुनवाई और शिकायत निस्तारण व्यवस्था सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि भविष्य में भी किसी अधिकारी का प्रदर्शन खराब पाया गया या जनता की शिकायतों के समाधान में लापरवाही सामने आई तो उसके खिलाफ और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस कार्रवाई से अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
