बहेड़ी के डॉ. नताशा अल्ट्रासाउंड सेंटर पर गंभीर आरोप:

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बहेड़ी के डॉ. नताशा अल्ट्रासाउंड सेंटर पर गंभीर आरोप:

फिरोज खान/यूपी हेड
ब्यूरो रिपोर्ट/राजेश सिंह

गलत रिपोर्ट से मरीज की जान पर बन आई, कई अस्पतालों के चक्कर में पूरी रात तड़पा

बहेड़ी। लोधीपुर स्थित डॉ. नताशा अल्ट्रासाउंड सेंटर पर एक मरीज ने गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। मरीज के अनुसार, गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट ने न सिर्फ उसकी बीमारी बढ़ा दी, बल्कि हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे रातभर कई अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े और जान पर बन आई।

रिपोर्ट में 8.8 mm की पथरी को 2–2.5 mm बताया गया मरीज का आरोप

मरीज ने बताया कि 3 दिसंबर की शाम करीब 4 बजे उसने इस सेंटर पर अल्ट्रासाउंड करवाया। बोर्ड पर MBBS, MD लिखा देखकर भरोसा किया, लेकिन रिपोर्ट में 8.8 mm की पथरी को मात्र 2–2.5 mm बताया गया।

उसी आधार पर दिए गए उपचार से मरीज की तबीयत और बिगड़ने लगी। दर्द बढ़ता गया और पेशाब रुक-रुक कर आने लगा।

डॉ. जहीर के पास पहुंचा तो ब्लैडर से नलकी डालकर पेशाब निकलवाया

बिगड़ती हालत में मरीज डॉ. जहीर के पास गया, जहां नलकी डालकर पेशाब निकाला गया। कुछ देर राहत मिलने के बाद वह घर आकर आराम करने लगा, लेकिन रात में हालात दोबारा गंभीर हो गए।

दर्द और परेशानी बढ़ने पर पेशाब आना पूरी तरह बंद हो गया।

यूनिटी हॉस्पिटल में ‘गलत तरीके से नलकी डालने’ का आरोप खून बहने लगा

रात करीब 2 बजे मरीज यूनिटी हॉस्पिटल पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि यहां बार-बार गलत तरीके से नलकी डाली गई, जिससे मरीज के पेनिस से भारी मात्रा में खून निकलने लगा।

मरीज ने जब पूछा कि खून क्यों नहीं रुक रहा, तो डॉक्टर ने कहा“केस बिगड़ गया है, खून अब नहीं रुकेगा… बरेली या रुद्रपुर ले जाओ।”

यह सुनकर परिजन घबरा गए और तुरंत कार से बरेली के लिए रवाना हो गए।

M. खान हॉस्पिटल में बची जान डॉक्टर ने सही तरीके से नलकी डालकर पेशाब निकाला

करीब 4 बजे मरीज M. खान हॉस्पिटल पहुंचा, जहां डॉक्टर ने पहले केस बिगड़ा हुआ बताते हुए स्थिति समझी, फिर नलकी डालकर पेशाब और खून के थक्के (चिछड़े) निकाले। इससे मरीज को राहत मिली।

दोबारा अल्ट्रासाउंड में निकली 8.8 mm की बड़ी पथरी तत्काल ऑपरेशन

डॉक्टर ने मरीज का अल्ट्रासाउंड लैंडमार्क अल्ट्रासाउंड सेंटर पर कराया, जिसमें पथरी 8.8 mm पाई गई। इसके बाद उसे भर्ती कर ऑपरेशन किया गया, जिसमें 8.8 mm की मुख्य पथरी और उससे बड़े-छोटे कई टुकड़े निकाले गए।

मरीज का कहना है“अगर पहली रिपोर्ट सही होती, तो मुझे यह सब नहीं झेलना पड़ता। गलत रिपोर्ट और गलत तरीके से की गई जांच ने मेरी जान जोखिम में डाल दी।”

परिजनों की मांग ऐसे अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर हो सख्त कार्रवाई

परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे जांच केंद्रों पर कठोर कार्रवाई की जाए, क्योंकि गलत जांच और गलत रिपोर्ट मरीज की जान ले सकती है। उन्होंने कहा कि लोग ऐसे केंद्रों से सतर्क रहें और प्रमाणित, विश्वसनीय जगह ही जांच कराएं।

 

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Author: Bhaskar News 24

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