11 बजे एक साथ गूंजा ‘वन्दे मातरम्’, नैब उत्तराखण्ड में सांकेतिक भाषा दिवस पर दिखी प्रतिभा और संस्कृति की अनोखी झलक
मूक-बधिर बच्चों ने भाषण, पोस्टर और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया सांकेतिक भाषा के सम्मान और विस्तार का संदेश
हल्द्वानी, 25 सितंबर 2026।
देशभर में आज सुबह 11 बजे एक साथ गूंजे ‘वन्दे मातरम्’ के स्वर ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। इसी क्रम में नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड (नैब) उत्तराखण्ड के आवासीय संसाधन केन्द्र में भी बच्चों और स्टाफ ने सामूहिक रूप से वन्दे मातरम् का गायन किया। इस आयोजन को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
वहीं, 23 सितंबर को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस का आयोजन नैब उत्तराखण्ड में आज विशेष रूप से किया गया। स्कूलों में परीक्षाओं के चलते कार्यक्रम को 25 सितंबर को आयोजित किया गया, जिसमें मूक-बधिर बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सांकेतिक भाषा में भाषण, पोस्टर प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। प्रस्तुतियों के जरिए सांकेतिक भाषा के महत्व, इसके व्यापक उपयोग और समाज में इसके प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता हरिदत्त जोशी, संध्या डालाकोटी, नैब अध्यक्षा सविता लाहोटी, उपाध्यक्षा मोनिका कोठारी, उपकोषाध्यक्ष चन्दन सिंह किरौला, कार्यकारिणी सदस्य बंसत कंसल सहित नैब उत्तराखण्ड का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
सांकेतिक भाषा बनी बच्चों की आवाज
कार्यक्रम का सबसे खास पहलू यह रहा कि बच्चों ने अपनी अभिव्यक्ति के लिए सांकेतिक भाषा को माध्यम बनाते हुए यह संदेश दिया कि अभिव्यक्ति के लिए आवाज ही जरूरी नहीं, भावनाओं और प्रतिभा को व्यक्त करने के लिए सांकेतिक भाषा भी एक सशक्त माध्यम है। कार्यक्रम ने सांकेतिक भाषा को लेकर समाज में सम्मान, समझ और जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया।




