नकटिया नदी को मिला नया नाम ‘नाथ गंगा’, 30 टन कचरा हटाया; 10 लाख वेटिवर लीव्स और 1500 पौधे रोपे
सम्पादक धीरू यादव बरेली
बरेली। नकटिया नदी को स्वच्छ, निर्मल और जीवंत बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे नदी पुनर्जीवन अभियान के तहत व्यापक स्तर पर सफाई एवं पर्यावरण संरक्षण कार्य किए गए। अभियान के दौरान नदी से करीब 30 टन कचरा हटाया गया, वहीं 10 लाख वेटिवर लीव्स और 1500 पौधे रोपे गए। अभियान के दौरान नकटिया नदी को ‘नाथ गंगा’ नाम से विकसित करने की दिशा में भी पहल की गई।
अभियान में सरकारी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने भागीदारी की। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी अभियान में सहयोग दिया। आयोजकों का कहना है कि जनभागीदारी से नकटिया नदी पुनर्जीवन अभियान को नई गति मिली है। अभियान ने यह संदेश भी दिया कि नदी और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बरेली कैंट में वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट का शुभारंभ
नदी पुनर्जीवन अभियान के साथ ही बरेली कैंट स्थित इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर में वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट का शुभारंभ किया गया। इसका उद्घाटन मुख्य अतिथि डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने किया। यूनिट के माध्यम से जैविक एवं गीले कचरे का वैज्ञानिक उपचार कर उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद तैयार की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य कचरे की मात्रा कम करने, लैंडफिल पर दबाव घटाने और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण-अनुकूल अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना है।
IVRI के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया
वर्मी कम्पोस्टिंग व्यवस्था को वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाने के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), इज्जतनगर, बरेली के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके जरिए तकनीकी विशेषज्ञता, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और बेहतर प्रबंधन पद्धतियों को छावनी के अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र में शामिल किया जाएगा।
छावनी परिषद पहले से ही कचरा पृथक्करण, कम्पोस्टिंग, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में विभिन्न पहल कर रही है। वर्मी कम्पोस्टिंग यूनिट को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
नकटिया को स्वच्छ और जीवंत नदी बनाने का लक्ष्य
नकटिया नदी पुनर्जीवन मिशन का दीर्घकालिक लक्ष्य नदी को स्वच्छ, निर्मल, हरी-भरी, स्वस्थ और जीवंत नदी के रूप में विकसित करना है। इसके साथ बरेली कैंट में पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का स्थायी मॉडल तैयार करने की योजना है।
डॉ. तनु जैन ने अभियान से जुड़े सभी लोगों का आभार जताते हुए कहा कि नकटिया नदी का वास्तविक पुनर्जीवन तभी संभव है, जब समाज लगातार अपनी भागीदारी निभाए।




