यूपी की सियासत में हलचल: स्वामी प्रसाद मौर्य की आज़म खान से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

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यूपी की सियासत में हलचल: स्वामी प्रसाद मौर्य की आज़म खान से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी

फिरोज खान भास्कर टुडे

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नए समीकरण बनते और पुराने रिश्ते फिर से मजबूत होते दिख रहे हैं। रामपुर इसी कड़ी में शुक्रवार को एक अहम राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जब राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (RSP) के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य रामपुर पहुंचे। यहां उन्होंने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आज़म खान से मुलाकात की।

यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आज़म खान से मुलाकात कर सियासी चर्चा को हवा दी थी। लगातार हो रही इन बैठकों ने प्रदेश की राजनीति में नए गठबंधनों और रणनीतियों को लेकर अटकलों को तेज कर दिया है।

मौर्य बोले— “सिर्फ़ शिष्टाचार भेंट”

रामपुर पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि यह मुलाकात सिर्फ़ एक शिष्टाचार भेंट है और इसका कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “आज़म खान वरिष्ठ नेता हैं, उनके स्वास्थ्य और हालचाल जानने के लिए मैं आया हूं। राजनीति में मतभेद होते हैं, लेकिन सम्मान का रिश्ता हमेशा बना रहता है।”

हालांकि राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मौर्य की यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं है। 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के बीच दलित, पिछड़ा और मुस्लिम समीकरण को मजबूत करने की रणनीति के तहत यह मुलाकात अहम मानी जा रही है।

अखिलेश–आज़म मुलाकात के बाद अब नया सियासी संकेत

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही अखिलेश यादव ने भी आज़म खान से उनके आवास पर भेंट की थी। उस मुलाकात के बाद से ही यह चर्चा थी कि सपा, आज़म खान को फिर से सक्रिय राजनीति में लाने की कोशिश में है। अब स्वामी प्रसाद मौर्य की यह मुलाकात उस रणनीति का अगला कदम मानी जा रही है।

सूत्र बताते हैं कि मौर्य और आज़म खान के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत चली। दोनों नेताओं ने प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति और विपक्षी दलों की भूमिका पर चर्चा की।

संभावित गठबंधन की अटकलें तेज

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मौर्य, दलित-पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतदाताओं के साझा समीकरण को साधने की कोशिश में हैं। ऐसे में अगर भविष्य में राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी और सपा के बीच कोई तालमेल बनता है तो यह भाजपा के लिए एक नई चुनौती साबित हो सकता है।

आजम खान लंबे समय से सक्रिय राजनीति से दूर हैं, लेकिन रामपुर में उनका प्रभाव अभी भी बरकरार है। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य 2022 में भाजपा छोड़कर सपा में आए थे, और बाद में अपनी पार्टी बनाकर अलग राह पकड़ी। अब उनकी आज़म खान से नजदीकियां नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत की ओर इशारा कर रही हैं।

मौर्य और आज़म की मुलाकात को भले ही दोनों “शिष्टाचार भेंट” बता रहे हों, लेकिन राजनीतिक माहौल कुछ और कहानी कह रहा है। यूपी की सियासत में बदलाव की आहट महसूस की जा रही है और आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सिर्फ़ औपचारिक भेंट थी या किसी बड़े गठबंधन की नींव रखी जा चुकी है।

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Author: Bhaskar News 24

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