उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड भंग किए जाने पर मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी का सवाल “अल्पसंख्यक हितों के नाम पर क्यों किया जा रहा है दोहराव?”
फिरोज खान भास्कर टुडे
रिपोर्ट-रफत आलम
बरेली। अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ़्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग किए जाने और नए अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक (Minority Education Bill) को पारित करने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से मुस्लिम समाज में भ्रम और चिंता का माहौल है।
मौलाना रज़वी ने कहा कि अब यह कहा जा रहा है कि अल्पसंख्यकों से जुड़े सभी मामलों की जिम्मेदारी इस नए विधेयक के तहत आएगी और मदरसों का प्रशासन एवं नियंत्रण भी इसी के अधीन होगा।
उन्होंने पूछा कि जब पहले से ही मदरसा शिक्षा बोर्ड जैसी संस्था मौजूद थी, जो नीतियां लागू करने, परीक्षाएं आयोजित करने और मदरसों का प्रबंधन संभालने का कार्य करती थी, तो फिर एक नया बिल लाने और बोर्ड को समाप्त करने की आवश्यकता क्या थी?
उन्होंने आगे कहा कि यदि वास्तव में उत्तराखंड सरकार अल्पसंख्यकों के हित में काम करना चाहती है, तो उसे पहले से स्थापित बोर्ड को मज़बूत करना चाहिए था, न कि उसे भंग करके नई व्यवस्था लागू करनी चाहिए थी।
मौलाना रज़वी ने आशंका जताई कि यह कदम मदरसों की स्वायत्तता को प्रभावित कर सकता है और धार्मिक शिक्षा के क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप का रास्ता खोल सकता है।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि वह अपने निर्णय पर पुनर्विचार करे और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित कर पारदर्शी नीति अपनाए। मौलाना रज़वी ने कहा कि किसी भी सुधार का उद्देश्य यदि शिक्षा को बेहतर बनाना है, तो उसके लिए संवाद और सहयोग की आवश्यकता होती है, न कि संस्थाओं को खत्म करने की।





