फैसला जीतना नहीं, सही न्याय दिलाना सबसे बड़ा लक्ष्य — भावी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की छात्रों को प्रेरक सीख

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फैसला जीतना नहीं, सही न्याय दिलाना सबसे बड़ा लक्ष्य — भावी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की छात्रों को प्रेरक सीख

रिपोर्ट सत्य प्रकाश
लखनऊ स्थित डॉ. लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में देश के अगले मुख्य न्यायाधीश बनने वाले न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कानून के छात्रों को जीवन और पेशे से जुड़ी बेहद महत्वपूर्ण सीख दी। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वकालत के शुरुआती दिनों में ओवरकॉन्फिडेंस के कारण वे एक प्रॉपर्टी विवाद का केस हार गए थे। वह हार उनके लिए एक बड़ी सीख साबित हुई। उसी दिन से उन्होंने एक छोटी-सी नोटबुक अपने साथ रखना शुरू किया, जिसमें वे हर गलती और उससे मिली सीख को लिखते हैं, ताकि भविष्य में वही भूल दोबारा न हो।

उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि कानून के क्षेत्र में अद्यतन रहना अत्यंत आवश्यक है। कई ऐसे वकील उन्होंने देखे जो कभी बेहतरीन थे, परंतु समय के साथ खुद को अपडेट न करने के कारण पीछे छूट गए। इसलिए, आत्ममूल्यांकन की आदत डालें और हर केस के बाद खुद से सवाल करें—क्या तैयारी ठीक थी? क्या दलीलें प्रभावी थीं? उनके अनुसार, केस जीतना ही सब कुछ नहीं होता, बल्कि न्याय दिलाना सर्वोच्च उद्देश्य है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने आगे कहा कि लगभग 15 साल की प्रैक्टिस के बाद हर वकील को खुद से यह प्रश्न अवश्य करना चाहिए कि क्या उसकी तर्कशैली और प्रयास भविष्य के सौ मामलों के समाधान में दिशा दे सकते हैं या नहीं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। उन्होंने अपने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि पहले जिला जज के चैंबर में एसी नहीं होता था। बाद में इसे इसलिए लगवाया गया ताकि जब भी बार एसोसिएशन नाराज़ हो, तो AC उनका गुस्सा थोड़ा ठंडा कर सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्य बोलना और धर्म की रक्षा करना भारतीय जीवन का आधार है। उपासना भले अलग-अलग हो सकती है, लेकिन धर्म—अर्थात् कर्तव्य और सदाचार—सबका समान होता है।

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Author: Bhaskar News 24

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